देखने नहीं, महसूस करने वाली फिल्म है 'ऑक्टोबर'
राजीव रंजन 3.5 स्टार (साढ़े तीन स्टार) कलाकार: वरुण धवन, बनिता संधू, गीतांजलि राव, साहिल वेडोलिया निर्देशक: शूजित सरकार निर्माता: रोनी लाहिरी, शील कुमार कहानी, पटकथा व संवाद: जूही चतुर्वेदी सिनमेटोग्राफी: अविक मुखोपाध्याय संगीत: शांतनु मोइत्रा, अभिषेक अरोड़ा और अनुपम रॉय संपादन: चंद्रशेखर प्रजापति कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जो मनोरंजन नहीं करतीं, मन को छू जाती हैं, मन में गहरे बैठ जाती हैं। शूजित सरकार निर्देशित ‘ऑक्टोबर’ भी ऐसी ही फिल्म है। प्रख्यात साहित्यकार अज्ञेय की प्रसिद्ध पंक्ति है- ‘दुख आदमी को मांजता है’। और जाहिर है, मंजने के बाद कोई भी चीज साफ हो जाती है, निर्मल हो जाती है। कई त्रासदियां हमें एक ज्यादा संवेदनशील मनुष्य बनाती हैं। फिल्म के नायक दानिश को भी त्रासदी ऐसे ही मांजती है और एक दर्शक के रूप में हम भी उस प्रक्रिया से अछूते नहीं रहते। और इस दौरान एक उम्मीद के टूट जाने के डर और फिर से जिंदा हो जाने की खुशी के बीच बार-बार आंखों में नमी महसूस करते हैं और कभी-कभी होठों पर निश्छल मुस्कराहट के कतरे भी। दानिश वालिया उर्फ डैन (वरुण धवन) दिल्ली के एक ...