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हर साल बढ़ रहा बॉलीवुड का बाजार

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हर साल बढ़ रहा बॉलीवुड का बाजार भारत में हर साल 20 से ज्यादा भाषाओं में 1,500 से ज्यादा फिल्में बनती हैं। दुनिया में सबसे ज्यादा फिल्में भारत के लोग देखते हैं। 2019 में भारत में 200 करोड़ से ज्यादा टिकटों की बिक्री हुई। कैसा रहा यह साल बॉलीवुड के लिए, बता रहे हैं  राजीव रंजन अगर फिल्मों की संख्या के लिहाज से देखें, तो भारतीय फिल्म उद्योग दुनिया में सबसे बड़ा है। भारत में हर साल 20 से ज्यादा भाषाओं में 1,500 से ज्यादा फिल्में बनती हैं। 2018 में भारत में 1,800 से ज्यादा फिल्मों का निर्माण हुआ। दुनिया में सबसे ज्यादा फिल्में भारत के लोग देखते हैं। पिछले साल 210 करोड़ से ज्यादा टिकटों की बिक्री हुई भारत में। वित्तीय वर्ष 2018 में भारतीय फिल्म उद्योग 15,890 करोड़ रुपये का था, जबकि वित्तीय वर्ष 2017 में यह आंकड़ा 14,500 रुपये था। अभी भारतीय फिल्म उद्योग का बाजार करीब 17,500 करोड़ रुपये है। 2020 के अंत तक इसके 23,800 करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान है। यह उद्योग 10 प्रतिशत से ज्यादा सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ रहा है। उम्मीद है कि निकट भविष्य में यह वृद्धि दर 11.9 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। भार...

फिल्म ‘हाउसफुल 4’ की समीक्षा

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बिलकुल खाली है यह सितारों से फुल हाउस राजीव रंजन निर्देशक : फरहाद सम्जी कलाकार: अक्षय कुमार ,  बॉबी देओल ,  रितेश देशमुख ,  कृति सैनन ,  कृति खरबंदा ,  पूजा हेगड़े ,  चंकी पांडे ,  रंजीत ,  जॉनी लीवर ,  शरद केलकर ,  राणा डग्गूबटी ,  मनोज पाहवा,  नवाजुद्दीन सिद्दीकी  स्टार-  1.5 कुछ फिल्मों को लेकर निर्माता-निर्देशक आश्वस्त होते हैं कि उन्होंने कैसी फिल्म बनाई है ,  किसके लिए बनाई है। ऐसी फिल्मों के दर्शक भी आश्वस्त रहते हैं कि उन्हें क्या मिलने वाला है ,  इसलिए वे भी दिमाग घर पर छोड़ कर थियेटर में जाते हैं।  ‘ गोलमाल ’, ‘ धमाल ’, ‘ हाउसफुल ’  आदि फिल्में इसी श्रेणी की फिल्में होती हैं। इनसे दर्शकों को  ‘ लॉजिक ’  नहीं ,  बस कॉमेडी के  ‘ मैजिक ’  की उम्मीद होती है। लेकिन कॉमेडी का मैजिक भी न मिले ,  तो निराशा होती है।  ‘ हाउसफुल  4’  ऐसी ही फिल्म है। हैरी (अक्षय कुमार) अपने भाइयों मैक्स (बॉबी देओल) और रॉय (रितेश देशमुख) के साथ लंदन में एक ...

सौ करोड़ नहीं, अब दो सौ करोड़ का दौर

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राजीव रंजन अगर किसी के अच्छे दिन चल रहे हैं, तो वह है बॉलीवुड। कोई मंदी लोगों के सिनेमाप्रेम के आड़े नहीं आ रही है। अपवादों को छोड़ दें, तो फिल्म अगर थोड़ी भी ठीक हुई, उसे दर्शकों ने शाबासी दी। ऐसा लग रहा है कि लोग फिल्में देखने के लिए उत्सुक हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दो बड़ी फिल्में रिलीज हुई थीं। अक्षय कुमार की ‘मिशन मंगल’ और जॉन अब्राहम की ‘बाटला हाउस’। दो बड़ी फिल्मों के एक ही दिन रिलीज होने के बावजूद दर्शकों ने उन्हें हाथोंहाथ लिया। ‘मिशन मंगल’ तो अक्षय की पहली ‘दो सौ करोड़ी’ और अब तक की सबसे कमाऊ फिल्म है। वहीं ‘बाटला हाउस’ ने भी 100 करोड़ के करीब कारोबार किया। इन दोनों के बाद आई ‘साहो’ ने भी कमजोर कंटेंट के बावजूद प्रभास और अपने एक्शन के दम पर केवल हिंदी में 149 करोड़ रुपये कमाए। बॉक्स ऑफिस पर मुद्राओं की बरसात इसके बाद भी जारी रही। ‘छिछोरे’ ने अपने कंटेंट के दम पर 150 करोड़ से ज्यादा कमाए और सुशांत सिंह राजपूत की सबसे सफल फिल्म बनी। फिर आयुष्मान खुराना की ‘ड्रीम गर्ल’ ने सिर्फ कॉमेडी की बदौलत 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर आई हृतिक रोशन और ...

फिल्म केसरी की समीक्षा

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असली महानायकों की दास्तान राजीव रंजन कलाकार:  अक्षय कुमार ,  परिणीति चोपड़ा ,  राकेश चतुर्वेदी ,  विक्रम कोचर ,  सुविंदर विक्की ,  वंश भारद्वाज ,  सुरमीत सिंह बेसरा ,  अश्वत्थ भट्ट ,  मीर सरवर निर्देशक:  अनुराग सिंह स्टार-  3.5 ( साढ़े तीन) स्टार 12  सितंबर  1897  को तत्कालीन भारत के नॉर्थ-वेस्ट फ्रंटियर प्रांत (अब पाकिस्तान का खैबर पख्तुनवा प्रांत) में हुई  ‘ सारागढ़ी की लड़ाई ’  भारत ही नहीं ,  विश्व इतिहास की सबसे गौरवपूर्ण गाथाओं में से एक है। सुबह से शाम तक चली इस लड़ाई सिख सैनिकों ने जिस शौर्य का प्रदर्शन किया था ,  वह अतुलनीय है। सिर्फ इक्कीस सिख सिपाहियों ने दस हजार से ज्यादा अफगानों को तब तक रोके रखा ,  जब तक कि आखिरी सिपाही नहीं शहीद हो गया। इस लड़ाई में  21  सिख सैनिक और करीब  600  अफगान मारे गए थे। दो दिन बाद ब्रिटिश भारतीय फौज की एक दूसरी टुकड़ी ने अफगानों को खदेड़ कर सारागढ़ी पर फिर से कब्जा कर लिया था। लेकिन क्या विडंबना है कि शौर्य की इस महान गाथा क...

फिल्म 2.0 की समीक्षा

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तकनीक के जरिये तकनीक के खतरों की बात राजीव रंजन निर्देशक:  एस. शंकर बैनर:  लाइका प्रोडक्शंस कलाकार:  रजनीकांत, अक्षय कुमार, एमी जैक्सन, आदिल हुसैन, कैजाद कोतवाल, सुधांशु पांडेय संगीत:  ए.आर. रहमान ढाई स्टार (2.5 स्टार) तकनीकी प्रगति ने मनुष्य को बहुत सुविधाएं मुहैया कराई हैं, तो बहुत सारी परेशानियां भी पैदा की हैं। पर इसमें दोष तकनीक का नहीं, बल्कि उसके गलत इस्तेमाल का है। ‘रोबोट’ जैसी तकनीकी दृष्टि से उन्नत फिल्म के निर्देशक शंकर ने यह बात इसी फिल्म के सीक्वल ‘2.0’ के जरिये कहने की कोशिश की है। दरअसल, मनुष्य ने अपनी तात्कालिक जरूरतों की पूर्ति के लिए खुद पर मंडरा रहे दीर्घकालीन खतरों के प्रति आंखें मूंद ली हैं। आज मोबाइल लोगों के जीवन की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है, लेकिन इसका रेडिएशन कितना बड़ा खतरा बन सकता है, हम इस पर थोड़ा भी सोचने को तैयार नहीं। जो एकाध लोग सोच रहे हैं, उनकी सुनने को कोई तैयार नहीं। ‘2.0’ की कहानी इसी विषय के ईर्द-गिर्द बुनी गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अपने नायाब नमूने चिट्टी (रजनीकांत) को विघटित करने के बाद डॉ. वशीकरण (रजनी...