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फिल्म ‘जबरिया जोड़ी’ की समीक्षा

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नाम जबर और फिलिम लचर राजीव रंजन कलाकार: सिद्धार्थ मल्होत्रा, परिणीति चोपड़ा, जावेद जाफरी, संजय मिश्रा, शीबा चड्ढा, अपारशक्ति खुराना, चंदन राय सान्याल, शरद कपूर, नीरज सूद निर्देशक: प्रशांत सिंह 2 स्टार बहुत साल पहले बिहार के भोजपुर जिले के मुख्यालय आरा में एक ही दिन कई लड़कों का एक साथ अपहरण कर लिया गया था। उन लड़कों को एक गांव में ले जाकर उनकी जबरदस्ती शादी करा दी गई थी। उनमें एक लड़के को मैं व्यक्तिगत रूप से जानता हूं। दरअसल जिस गांव में उन्हें ले जाया गया था, वहां की लड़कियों की शादी नहीं हो पा रही थी। इसलिए कुछ लोगों ने फैसला किया कि सीधे तरीके से शादी नहीं हो पा रही है, तो उल्टा तरीका अपनाया जाए। ये तो तस्वीर का एक पहलू था। दूसरा पहलू यह है कि जिन लड़कियों की ऐसे शादी करा दी गई थी, उनकी जिंदगी अंधेरे बंद कमरों की तरह हो गई, जहां न रोशनी पहुंचती है, न हवा आती है। बस दिन-रात घुटन। उन्हें न तो ससुराल वालों ने अपना माना, पति ने अपना समझा। कम से कम जिस लड़के को मैं जानता हूं, उसके बारे में तो निश्चयपूर्वक कह सकता हूं। हमारे समाज में लड़कियों की शादी एक ऐसा मुद्दा है कि उसके लिए मा...

फिल्म केसरी की समीक्षा

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असली महानायकों की दास्तान राजीव रंजन कलाकार:  अक्षय कुमार ,  परिणीति चोपड़ा ,  राकेश चतुर्वेदी ,  विक्रम कोचर ,  सुविंदर विक्की ,  वंश भारद्वाज ,  सुरमीत सिंह बेसरा ,  अश्वत्थ भट्ट ,  मीर सरवर निर्देशक:  अनुराग सिंह स्टार-  3.5 ( साढ़े तीन) स्टार 12  सितंबर  1897  को तत्कालीन भारत के नॉर्थ-वेस्ट फ्रंटियर प्रांत (अब पाकिस्तान का खैबर पख्तुनवा प्रांत) में हुई  ‘ सारागढ़ी की लड़ाई ’  भारत ही नहीं ,  विश्व इतिहास की सबसे गौरवपूर्ण गाथाओं में से एक है। सुबह से शाम तक चली इस लड़ाई सिख सैनिकों ने जिस शौर्य का प्रदर्शन किया था ,  वह अतुलनीय है। सिर्फ इक्कीस सिख सिपाहियों ने दस हजार से ज्यादा अफगानों को तब तक रोके रखा ,  जब तक कि आखिरी सिपाही नहीं शहीद हो गया। इस लड़ाई में  21  सिख सैनिक और करीब  600  अफगान मारे गए थे। दो दिन बाद ब्रिटिश भारतीय फौज की एक दूसरी टुकड़ी ने अफगानों को खदेड़ कर सारागढ़ी पर फिर से कब्जा कर लिया था। लेकिन क्या विडंबना है कि शौर्य की इस महान गाथा क...

फिल्म ‘नमस्ते इंग्लैंड’ की समीक्षा

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दूर से ही नमस्ते ठीक है राजीव रंजन कलाकार: अर्जुन कपूर ,  परिणीति चोपड़ा ,  अलंकृता सहाय ,  आदित्य सील ,  सतीश कौशिक निर्देशक: विपुल अमृतलाल शाह स्टार: 1.5 (डेढ़ स्टार) तालियां दो तरह की होती हैं। जब कोई प्रस्तुति दर्शकों-श्रोताओं को पसंद आती है,  तो आखिर में बजती हैं और जब कोई परफॉर्मेंस दर्शकों के झेलने की क्षमता से बाहर हो जाता है तो बीच में ही बजने लगती हैं- खत्म करो ,  अब बख्श दो।  ‘ नमस्ते इंग्लैंड ’  दूसरी श्रेणी वाली प्रस्तुति है ,  जिसे देखते वक्त बार-बार यही ख्याल आता है कि ये फिल्म खत्म कब होगी! सवा दो घंटे का समय भी पहाड़ जैसा लगने लगता है। एक सवाल मन में अक्सर उठता है कि कोई फिल्म क्यों देखी जाए ?  इस सवाल के कई जवाब हो सकते हैं ,  जो हर व्यक्ति के टेस्ट ,  मानसिक स्तर पर निर्भर करते हैं। लेकिन  ‘ नमस्ते इंग्लैंड ’  के संदर्भ में इस सवाल का एक भी जवाब जेहन में नहीं आता है ,  सिवाय इसके कि निर्माता का मन फिल्म बनाने का था और उसके पास पैसे थे ,  इसलिए उसे निर्देशक ,  हीरो-हीरोइन ...