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देखने लायक है ये  ‘ लड़की ’ राजीव रंजन कलाकार:   अनिल कपूर ,  राजकुमार राव ,  सोनम कपूर ,  जुही चावला ,  बृजेंद्र काला ,  सीमा पाहवा,  अभिषेक दुहान,  रेजिना कसांद्रा,  मधुमालती कपूर निर्देशक:  शैली चोपड़ा धर तीन ( 3  स्टार) आज से 25  साल पहले रिलीज हुई  ‘1942  ए लव स्टोरी ’  में  ‘ एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा ’  गाना अनिल कपूर ने मनीषा कोइराला के लिए गाया था।  ‘ एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा ’  में वो गाना सोनम कपूर अपनी प्रेमिका रेजिना कसांद्रा के लिए गाती हैं। गाने के संदर्भ में यह परिवर्तन इन  25  वर्षों में हमारे समाज और सिनेमा के बदलाव का भी थोड़ा-बहुत संकेत देता है। हालांकि कुछ अपवादों को छोड़ दें ,  तो समलैंगिकता को अभी भी समाज और सिनेमा दोनों में स्वीकार नहीं किया गया है ,  लेकिन अब अपराध भी नहीं है। पहले इस पर बात करना भी उचित नहीं समझा जाता था ,  लेकिन अब इस पर बात हो रही है।  और बात निकली है ,  तो शायद दूर तलक पहुंचे। अब बात कहानी की.....

अभिनय को देखो, चेहरा न देखो

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राजीव रंजन मायानगरी की मायावी दुनिया अब अपना चेहरा बदल रही है। इस मायावी दुनिया के द्वार पर यथार्थ पिछले कुछ सालों से लगातार दस्तक हो रही थी। ये दस्तक उन कलाकारों, फिल्मकारों की थी, जो इस चकाचौंध भरी नगरी के बने-बनाए खांचों में फिट नहीं होते थे, लेकिन उनके पास एक अलग शैली थी, कुछ अलग-सी कहानियां थीं। वह दस्तक मायानगरी के अंदर सुनी तो जा रही थी, लेकिन उसके पट नहीं खुल रहे थे। हां, 2017 में इस दस्तक से द्वार की सांकल जरूर खुल गई थी और ‘फुकरे रिटन्र्स’, ‘न्यूटन’, शुभ मंगल सावधान, बरेली की बर्फी, लिपस्टिक अंडर माई बुर्का जैसी फिल्में न सिर्फ आलोचकों द्वारा सराही गईं, बल्कि व्यावसायिक रूप से भी हिट रहीं। इनमें काम करने वाले कलाकार लोगों के जेहन में उतरने लगे। इन फिल्मों के निर्देशकों को लोग जानने लगे। वर्ष 2018 ने बाकी का काम पूरा कर दिया और दरवाजे को पूरी तरह खोल दिया। अगर आप इस साल की फिल्मों और उनमें का करने वाले कलाकारों पर नजर डालें तो एक नया-सा कोलाज दिखाई देगा। उस कोलाज में स्टारों के चेहरे इक्का-दुक्का ही नजर आएंगे। उस कोलाज में ऐसे चेहरे नजर आएंगे, जिनकी पहचान उनकी सूरत नहीं,...

फिल्म स्त्री की समीक्षा

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हंसी और डर के जरिये स्त्री का बात राजीव रंजन कलाकार : राजकुमार राव , श्रद्धा कपूर , पंकज त्रिपाठी , अपारशक्ति खुराना , अभिषेक बनर्जी , विजय राज , अतुल श्रीवास्तव निर्देशक : अमर कौशिक 3 स्टार ( तीन स्टार ) गोलमाल सिरीज की पिछली किस्त ‘ गोलमाल अगेन ’ की शानदार सफलता ने बॉलीवुड में हॉरर - कॉमेडी विधा के लिए संभावनाओं के नए दरवाजे खोले हैं। ‘ स्त्री ’ भी इसी शैली की फिल्म है। हालांकि इसे सिर्फ इसी खांचे में रख कर देखना इसके साथ पूरा न्याय नहीं होगा। दरअसल यह फिल्म केवल डर और हंसी ही नहीं परोसती , कुछ कहने का प्रयास भी करती है। फिल्म की कहानी घटती है मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक शहर चंदेरी में। चंदेरी अपनी सिल्क और कॉटन की हस्तनिर्मित साड़ियों के लिए मशहूर रहा है , लेकिन फिल्म की कहानी का उससे कोई लेना - देना नहीं है। हां , कपड़े से फिल्म के तार जरूर जुड़े हैं। चंदेरी में तीन दोस्त रहते हैं - विकी ( राजकुमार राव ), बिट्टू ( अपारशक्ति खुराना ) और जना ...