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फिल्म पंगा की समीक्षा

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हर हद से पंगा लेती फिल्म राजीव रंजन निर्देशक: अश्विनी अय्यर तिवारी कलाकार: कंगना रनोट, जेसी गिल, रिचा चड्ढा, यज्ञ भसीन, नीना गुप्ता, मेघा बर्मन, राजेश तैलंग, स्मिता ताम्बे 3.5 स्टार बहुत कम फिल्में ऐसी होती हैं, जिसमें कोई खलनायक नहीं होता, जो पहले दृश्य से ही सकारात्मक तरंगें छोड़ना प्रारम्भ कर देती हैं और अंत में जब आप थियेटर से निकलते हैं, तो प्रेरणा से भरे होते हैं। कंगना रनोट की मुख्य भूमिका वाली ‘पंगा’ ऐसी ही फिल्म है। यह केवल एक कबड्डी खिलाड़ी के कमबैक की कहानी नहीं है, बल्कि जीवन में उम्मीदों के कमबैक की भी कहानी है। जया निगम (कंगना रनोट) भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तान रह चुकी है। वह अपने समय की सर्वश्रेष्ठ रेडर थी। उसकी शादी प्रशांत (जेसी गिल) से हो जाती है। शादी के बाद वह कबड्डी खेलना जारी रखती है। उसे डेढ़-दो साल बाद एशिया कप में टीम का नेतृत्व करना है। तभी वह प्रेग्नेंट हो जाती है। उसकी योजना है कि बच्चे को जन्म देने के बाद वह फील्ड में लौट आएगी, लेकिन उसका बेटा आदित्य (यज्ञ भसीन) जन्म के समय बहुत कमजोर होता है। उसका इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर है, इसलिए उसे ...

फिल्म ‘सेक्शन 375’ की समीक्षा

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न्याय प्रक्रिया के छिद्रों में झांकती फिल्म राजीव रंजन निर्देशक: अजय बहल कलाकार: अक्षय खन्ना, रिचा चड्ढा, राहुल भट्ट, मीरा चोपड़ा, कृतिका देसाई 3 स्टार कहते हैं कि जो दिखता है, जरूरी नहीं कि सच हो। हो सकता है कि सच परतों के नीचे दबा हो, और जो दिख रहा हो, वह  अर्द्धसत्य  हो, या झूठ भी हो। सच कोे ऊपर लाने के लिए परतों को उघाड़ना पड़ता है। फिल्म ‘सेक्शन 375’ यही काम करती है। वह भी सधे तरीके से। भारतीय दंड संहिता की धारा 375 रेप को परिभाषित करती है कि अगर किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध, उसकी सहमति के बगैर, जबरदस्ती, दबाव देकर, धोखाधड़ी कर या जब वह नशे में की हालत में हो, मानसिक रूप से ठीक हालत में नहीं हो और अगर उसकी उम्र 18 वर्ष से कम हो, तो उसके यौन संबंध स्थापित करना रेप है।’ फिल्म की कहानी इसी धारा की बुनियाद पर बुनी गई है। रोहन खुराना (राहुल भट्ट) एक बड़ा निर्देशक है। उस पर अपनी यूनिट में काम करने वाली एक जूनियर कॉस्ट्यूम असिस्टेंट अंजलि दांगले (मीरा चोपड़ा) के रेप का आरोप लगता है। सबूत इतने सशक्त और स्पष्ट हैं कि रोहन को 10 साल की सजा हो जाती है। वह अपनी पत्नी कायना...

थोड़ा देवदास और थोड़ा हैमलेट

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राजीव रंजन  फिल्म दास देव की समीक्षा कलाकार: सौरभ शुक्ला, राहुल भट्ट, रिचा चड्ढा, अदिति राव हैदरी, अनुराग कश्यप, दिलीप ताहिल, विनीत कुमार सिंह निर्देशक: सुधीर मिश्रा 2.5 स्टार (ढाई स्टार) शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के ‘देवदास’ ने भारतीय फिल्मकारों को अपनी ओर बहुत आकर्षित किया है। वह मूक सिनेमा से लेकर अब के अत्याधुनिक दौर तक भारतीय फिल्मकारों का पसंदीदा किरदार बना हुआ है। यही वजह है कि नरेश चंद्र मित्र,  प्रथमेश चंद्र बरुआ, बिमल राय से लेकर संजय लीला भंसाली, अनुराग कयश्प और अब सुधीर मिश्रा जैसे फिल्मकारों ने उसे अपने दृष्टिकोण के अनुसार पेश किया है। परेश बरुआ ने तो उसे दो वर्षों के अंतराल (1935-37) में तीन भाषाओं- बांग्ला, हिन्दी और असमिया- में निर्देशित किया था। यहां तक कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी ‘देवदास’ पर फिल्म बन चुकी है। बहरहाल, पहले के फिल्मकारों ने उसे मूल उपन्यास के आसपास ही रखने का प्रयास किया था, लेकिन संजय लीला भंसाली ने उसमें कुछ परिवर्तन कर पेश किया। वहीं अनुराग कश्यप ने उसे एक बिल्कुल नए संदर्भ में पेश किया। अब सुधीर मिश्रा ने देवदास को बिल्कु...