जान नहीं है नानू की जानू में
राजीव रंजन कलाकार: अभय देओल, पत्रलेखा, मनु ऋषि, राजेश शर्मा, बृजेंद्र काला, मनोज पाहवा, रेशमा खान निर्देशक: फराज हैदर निर्माता: साजिद कुरेशी लेखक: मनु ऋषि 1.5 स्टार (डेढ़ स्टार) ‘हॉरर कॉमेडी’ सुनने में बड़ा अच्छा लगता है। डर के साथ हंसी। देखने में भी अच्छा लगता, अगर दोनों को सही तरीके से मिलाया गया होता तो। लेकिन उसके लिए अच्छी स्क्रिप्ट, अच्छे निर्देशन और बढ़िया प्रस्तुतीकरण की जरूरत थी। दुर्भाग्य से फराज हैदर निर्देशित अभय देओल की ‘नानू की जानू’ में ऐसा हो नहीं पाया। लिहाजा फिल्म ‘भानुमति का कुनबा’ कुनबा बन कर रह गई, जिसमें ‘कहीं का ईंट कहीं का रोड़ा’ लगा है। आनंद यानी नानू (अभय देओल) प्रॉपर्टी माफिया का एजेंट है। वह नोएडा में डब्बू (मनु ऋषि) और अपने कुछ सहयोगियों के साथ पहले मकान किराये पर लेता है, फिर उस पर कब्जा कर लेता है और मकान मालिक से औने-पौने दाम में जबर्दस्ती खरीद कर प्रॉपर्टी माफिया को दे देता है। एक दिन वह अपने काम के सिलसिले में अपनी गाड़ी से कहीं जा रहा होता है। रास्ते में उसे एक घायल लड़की सड़क पर पड़ी दिखती है। वह उसे अस्पताल ले जाता है, लेकिन लड़की बच नहीं...