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फिल्म ‘लव सोनिया’ की समीक्षा

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एक ज्वलंत मुद्दा उठाने की कोशिश राजीव रंजन कलाकार: मृणाल ठाकुर ,  मनोज बाजपेयी ,  राजकुमार राव ,  फ्रीडा पिंटो ,  रिचा चड्ढा ,  आदिल हुसैन निर्देशक: तबरेज नूरानी स्टार: ढाई ( 2.5) हर दिन हमारे देश में सैकड़ों लड़कियां गायब हो जाती हैं और उनका कभी पता नहीं चल पाता। यूं भी कह सकते हैं कि उन्हें ढूंढ़ने की शिद्दत से कोशिश भी नहीं की जाती। अंत में घर वाले भी हार-थक कर संतोष कर लेते हैं और प्रशासन भी निश्चिंत होकर बैठ जाता है। और उन गुम कर दी गई लड़कियों में से ज्यादातर किसी शहर के रेडलाइट एरिया की अंधेरी सीलन भरी कोठरियों में अपनी जिंदगी के बाकी दिन गुजार देने को मजबूर होती हैं। उनमें से कुछ को विदेश भी भेज दिया जाता है ,  जिसके बदले कोठे के मालिकों को मोटा माल मिलता है। कोई-कोई वहां से निकलने की कोशिश करती हैं ,  तो उनके साथ ऐसा भयानक सलूक किया जाता है कि दूसरी लड़कियां उसे देख कर ही सिहर जाती हैं। वे वहां से बाहर निकलने की सोचने की जुर्रत भी नहीं कर पातीं। भारत में वेश्यावृत्ति के दलदल में फंसी करीब एक करोड़ महिलाओं में से करीब एक-चौथाई नाबालिग हैं...

फिल्म ‘गली गुलियां’ की समीक्षा

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अंधेरे से बाहर निकलने की जद्दोजहद राजीव रंजन कलाकार: मनोज बाजपेयी, रणवीर शौरी, नीरज कबी, शहाना गोस्वामी, ओम सिंह निर्देशक: दीपेश जैन 3.5 स्टार (साढ़े तीन स्टार) मशहूर शायर, अफसानानिगार और फिल्मकार गुलजार के शब्दों को थोड़े-से हेरफेर के साथ कहें, तो पुरानी दिल्ली की पेचीदा दलीलों-सी गलियां मायानगरी मुम्बई को हमेशा से आकर्षित करती रही हैं। इसलिए बॉलीवुड समय-समय पर दिल्ली-6 को केंद्र में रख कर कहानियां बुनता रहता है। उन कहानियों में इस इलाके के प्रति एक स्पष्ट लगाव मौजूद रहता है। निर्देशक दीपेश जैन की ‘गली गुलियां’ भी दिल्ली-6 यानी पुरानी दिल्ली को केंद्र में रख कर बुनी गई है। लेकिन यह इस इलाके को उस तरह से नहीं पेश करती, जिस तरह ‘मिर्जा गालिब’ में गुलजार और अपनी फिल्मों में ज्यादातर फिल्मकार पेश करते हैं। यह उस इलाके के एक अलग पहलू को चित्रित करती है। ‘गली गुलियां’ में पुरानी दिल्ली की संकरी, अस्त-व्यस्त गलियां और उनमें सीलन भरी कोठरियां माहौल को बोझिल बनाती हैं, दिमाग में तनाव पैदा करती हैं और उसे एक ऐसी जगह के रूप में पेश करती हैं, जो नॉस्टेल्जिया में नहीं ले जाता, बल्कि व...

रुख: सबके लिए नहीं है यह कहानी

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राजीव रंजन फिल्म: रुख ढाई स्टार (2.5 स्टार) निर्देशक: अतनु मुखर्जी निर्माता: मनीष मुंद्रा कलाकार: मनोज बाजपेयी, आदर्श गौरव, स्मिता तांबे, कुमुद मिश्रा संगीत: अमित त्रिवेदी एक बात पहले ही साफ कर देनी जरूरी है कि ‘रुख’ वीकेंड पर एन्जॉय करने वाला सिनेमा नहीं है। जिस तरीके से इसे बनाया गया है, उससे जान पड़ता है कि इसे मास के लिए ध्यान में रख कर नहीं बनाया गया है। हालांकि फिल्म की जो कहानी है, उसमें तेज गति वाली एक सस्पेंस थ्रिलर की तमाम संभावनाएं मौजूद थीं, साथ ही भावनापूर्ण दृश्यों की भी काफी संभावना थी, लेकिन लेखक-निर्देशक अतनु मुखर्जी ने इस कहानी को अपने तरीके से कहने की कोशिश की है। यह फिल्म दिखाती है कि अपने परिवार के भविष्य की चिंता में कोई व्यक्ति कहां तक जा सकता है! दिवाकर माथुर (मनोज बाजपेयी) मुंबई में एक चमड़े का कारखाना चलाता है। उसकी फैक्ट्री संकट में है। वह अपने पार्टनर रोबिन (कुमुद मिश्रा) से पैसों का इंतजाम करने के लिए कहता है, लेकिन रोबिन उसे उधार लेकर काम चलाने को कहता है और कुछ समय बाद पैसों का बंदोबस्त करने का आश्वासन देता है। दिवाकर कहीं से उधार लेकर फैक्ट्री...