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फिल्म सूरमा की समीक्षा

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यशोगान नहीं, एक वास्तविक योद्धा की कहानी राजीव रंजन कलाकार: दिलजीत दोसांझ, तापसी पन्नू, अंगद बेदी, विजय राज, सतीश कौशिक, कुलभूषण खरबंदा निर्देशक: शाद अली निर्माता: सोनी पिक्चर्स, चित्रांगदा सिंह, दीपक सिंह संगीत: शंकर-एहसान-लोय तीन स्टार (3 स्टार) बॉलीवुड में इन दिनों बायोपिक की बयार चल रही है। दो हफ्ते पहले ही ‘संजू’ रिलीज हुई थी और अब ‘सूरमा’ के जरिये भारतीय पुरुष हॉकी टीम के पूर्व कप्तान संदीप सिंह का जीवन-संघर्ष सामने है। एक समय था, जब भारत में हाकी खिलाड़ियों की पूछ हुआ करती थी। फिर धीरे-धीरे ऐसा समय आया कि भारतीय हॉकी अपने निम्नतम स्तर पर चली गई और लोगों की दिलचस्पी भी इसमें कम हो गई। हालांकि भारत में बढ़िया हॉकी खिलाड़ी पैदा होने बंद नहीं हुए थे, लेकिन सही प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और प्रेरणा के अभाव में टीम विश्व पटल पर उभर नहीं पा रही थी। ऐसे समय में संदीप सिंह जैसे खिलाड़ी का उदय भारतीय हॉकी के लिए शुभ संकेत था। हालांकि अपने करियर के शुरुआती दौर में ही दुर्घटनावश गोली लगने की वजह से संदीप का करियर खत्म होने की कगार पर पहुंच गया। लेकिन उन्होंने संघर्ष किया, अपने पैरों पर खड़े हुए, फि…

फिल्म संजू की समीक्षा

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एक दिलचस्प शख्स की नाटकीय कहानीराजीव रंजनकलाकार: रणबीर कपूर, परेश रावल, अनुष्का शर्मा, विकी कौशल, दीया मिर्जा, मनीषा कोईराला, जिम सर्बनिर्देशक: राजकुमार हिरानीनिर्माता: विधु विनोद चोपड़ा और राजकुमार हिरानीसंगीत: ए. आर. रहमान, रोहन रोहन और संजय वान्ड्रेकरलेखक: अभिजात जोशी, राजकुमार हिरानीरेटिंग: 3 स्टार
‘संजू’ आधिकारिक रूप से संजय दत्त के जीवन पर बनी है। लेकिन यह उनकी पूरी जीवनी नहीं है, क्योंकि फिल्म मुख्य रूप उनके जीवन के दो घटनाक्रमों पर केंद्रित है। पहला घटनाक्रम है संजू के नशे की लत में फंसने और उससे उबरने का संघर्ष। दूसरा घटनाक्रम है 1993 के बम विस्फोट कांड में फंसने, जेल जाने, बाहर आने और फिल्म उद्योग में फिर से अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराना। हालांकि ये दोनों उनके जीवन की निर्णायक घटनाएं हैं, उनके जीवन को परिभाषित करने वाली घटनाएं हैं, लेकिन उनके जीवन में इसके अलावा भी कई महत्वपूर्ण बातें हैं। इनमें उनके निजी रिश्ते, पारिवारिक जीवन व फिल्मी जीवन में उतार-चढ़ाव आदि शामिल हैं।


बहरहाल ‘संजू’ फिल्म की बात करते हैं। फिल्म की शुरुआत एक ऐसे दृश्य से होती है, जिसमें एक लेखक डी.एन. त्रिपा…

कहीं पहुंचती नहीं दिखती ये रेस

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फिल्म रेस 3 की समीक्षाराजीव रंजनकलाकार: अनिल कपूर, सलमान खान, जैक्लीन फर्नांडीज, डेजी शाह, बॉबी देओल, साकिब सलीमनिर्देशक: रेमो डीसूजा2 स्टार (दोस्टार)
रेस चाहे जिंदगी की हो या ट्रैक की, रोमांच की गारंटी होती है। बॉलीवुड की ‘रेस’सिरीज की पहली दो किस्तों के बारे में भी ये बात काफी हद तक कही जा सकती है। लेकिन ‘रेस 3’के बारे में ये बात नहीं कही जा सकती। हां, हर मिनट दर्जनों गाड़ियों को हवा में उड़ते, आग के गोले में तब्दील होने को रोमांच मान लिया जाए तो ‘रेस 3’में रोमांच है। किसी फिल्म में सलमान खान के होने को ही रोमांच माना जाए तो वह ‘रेस 3’में है। इसके अलावा इस फिल्म में कुछ भी ऐसा नहीं है, जिसे रोमांच माना जा सके। कहानी के नाम पर भी इसमें नया कुछ नहीं है।

शमशेर सिंह (अनिल कपूर) हथियारों का बहुत बड़ा सौदागर है और अल शिफह द्वीप पर उसने अपना साम्राज्य फैलाया हुआ है। वहां वह अपने भतीजे सिकंदर (सलमान खान), बेटी संजना (डेजी शाह), बेटे सूरज (साकिब सलीम) और एक वफादार रघु सक्सेना (शरत सक्सेना) के साथ रहता है। सिकंदर बहुत काबिल और ताकतवर है, जिससे उसके दोनों कजिन जलते हैं। सिकंदर का भी एक वफादार दोस्त…

पहले जैसा जादू नहीं इस क़िस्त में

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जुरासिक वर्ल्ड: फालेन किंगडम की समीक्षा

राजीव रंजन

कलाकार: ब्राइस डॉल्स हॉवर्ड, क्रिस प्रैट, जस्टिस स्मिथ, जेम्स क्रॉमवेल, राफे स्पैल, डेनियला पिनेडा, इसाबेला समान

निर्देशक: जे. ए. बेयोना।

3 स्टार

जुरासिक पार्क सीरीज के रजत जयंती वर्ष में इसकी पांचवी क़िस्त जुरासिक वर्ल्ड: फालेन किंगडम आई है। 1993 में जब इस साइंस फिक्शन की पहली क़िस्त जुरासिक पार्क आई थी तो उसे अपने बिलकुल नए विषय और अद्भुत प्रस्तुतीकरण से पूरी दुनिया को चौंका दिया था। उस फिल्म ने डायनासोरों को लेकर लोगों के मन में ऐसी उत्सुकता पैदा कर दी थी कि हर कोई उनके बारे में जानने को व्यग्र हो उठा। लिहाजा इस सीरीज की फिल्मों को लेकर लोगों में उत्साह और उत्सुकता लगातार बनी रही। क्या लोगों की उत्सुकता और उम्मीदों के साथ यह फिल्म पूरी तरह न्याय कर पाई है? इसका जवाब है फिल्म पटकथा और प्रस्तुतिकरण के स्तर पर उस मुकाम पर नहीं पहुंच पाई है। 


इस फिल्म की कहानी इसके प्रीक्वल जुरासिक वर्ल्ड की कहानी के 3 साल बाद शुरू होती है। आइसला नुब्लर में स्थित जुरासिक पार्क तहस नहस हो चुका है। वहां का ज्वालामुखी सक्रिय हो गया है। इसके कारण वहां रह रहे डायना…

मोमिन का शेर, ग़ालिब और इवान लेंडल

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राजीव रंजन
तुम मिरे पास होते हो गोया जब कोई दूसरा नहीं होता।


कुछ खोजते हुए बेसाख्ता इस शेर पर नजर पड़ गई। ये शेर मिज़र ग़ालिब के समकालीन अज़ीम शायर मोमिन खां ‘मोमिन’का है। मोमिन महान शायर तो थे ही, कहते हैं कि शतरंज के अच्छे खिलाड़ी और ज्योतिषी भी थे। यूं तो मोमिन ने कई अविस्मरणीय ग़ज़लें लिखी हैं। जैसेकि-
ठानी थी दिल में अब न मिलेंगे किसी से हम पर क्या करें कि हो गए नाचार जी से हम
हंसते जो देखते हैं किसी को किसी से हम मुंह देख देख रोते हैं किस बेकसी से हम
और एक ये भी-
वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो वही या’नी वा’दा निबाह का तुम्हें याद हो कि न याद हो
वो नए गिले वो शिकायतें वो मज़े मज़े की हिकायतें वो हर एक बात पे रूठना तुम्हें याद हो कि न याद हो
कभी हम में तुम में भी चाह थी कभी हम से तुम से भी राह थी कभी हम भी तुम भी थे आश्ना तुम्हें याद हो कि न याद हो
जिसे आप गिनते थे आश्ना जिसे आप कहते थे बा-वफ़ा मैं वही हूं 'मोमिन'-ए-मुब्तला तुम्हें याद हो कि न याद हो
लेकिन मोमिन का लिखा सबसे ज्यादा मशहूर और मज़्कूर शेर वही, सबसे ऊपर वाला है। दसअसल इसके पीछे एक दिलचस्प वाकया है, जिससे ग़ा…

भावेश जोशी सुपरहीरो: दम नहीं है इस सुपरहीरो में

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फिल्म ‘भावेश जोशी सुपरहीरो’की समीक्षाराजीव रंजनकलाकार: हर्षवर्द्धन कपूर, प्रियांशु पैन्यूली, आशीष वर्मा, निशिकांत कामत, श्रिया सब्बरवालनिर्देशक: विक्रमादित्य मोटवाणी 2 स्टार (दो स्टार)

आम आदमी की स्मृति में सुपरहीरो एक ऐसे मनुष्य के रूप दर्ज है, जिसके पास कुछ अद्भुत शक्तियां होती हैं और जो किसी भी बुराई को अपने दम पर खत्म करने का दम रखता है। विक्रमादित्य मोटवाणी का भावेश जोशी सुपरहीरो की इस प्रचलित धारणा से अलग है। उसके पास अद्भुत शक्तियां नहीं हैं, लेकिन बुराई से लड़ने का उसका जज्बा जरूर अद्भुत है। उसका मानना है कि किसी भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के असफल हो जाने, उसके राजनीतिक स्वार्थों की बलि चढ़ जाने के बावजूद भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई चलती रहनी चाहिए। अकेले ही सही, उसके खिलाफ संघर्ष जारी रहना चाहिए।
भावेश जोशी (प्रियांशु पैन्यूली), सिकंदर खन्ना उर्फ सिक्कू (हर्षवद्र्धन कपूर) और रजत (आशीष वर्मा) सन 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में हिस्सा लेते हैं। यह आंदोलन अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हो पाता। लेकिन भावेश निराश नहीं होता और सिक्कू के साथ मिल कर एक यूट्यूब चैनल ‘इन्साफ’ शुरू करता है। …

दुनिया को ताकत दिखाने की कहानी

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फिल्म परमाणु की समीक्षाकलाकार: जॉन अब्राहम, बोमन ईरानी, डायना पेंटी, विकास कुमार, योगेंद्र टिक्कू, दर्शन पंड्या, अनुजा साठेनिर्देशक: अभिषेक शर्मातीन स्टार (3 स्टार)


‘पोखरण 2’ भारत के सामरिक इतिहास में एक बड़ा मील का पत्थर है। 1998 में राजस्थान के पोखरण में हुए भारत के इस दूसरे परमाणु परीक्षण ने देश को एक पूर्ण परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया था। सबसे खास बात कि इस परमाणु परीक्षण की दुनियों को जरा भी खबर नहीं लगी। अमेरिका का बेहद सक्षम खुफिया तंत्र भी भारत के इस परमाणु परीक्षण के बारे में कुछ पता नहीं लगा सका। भारत की इस कामयाबी से बौखलाए अमेरिका ने भारत पर कठोर आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए, लेकिन उसका नतीजा बेअसर ही रहा।
इस तरह की कामयाबी कोई एक दिन या एक वर्ष का परिणाम नहीं होती। ऐसे लक्ष्यों को प्राप्त करने में दूरदर्शी योजना, रणनीति, वर्षों का परिश्रम, निष्ठा, दृढ़संकल्प की जरूरत होती। इसमें कई तरह के व्यवधान, समस्याएं भी सामने आती हैं और कई बार असफलता भी हाथ लगती है, लेकिन जब नेतृत्व दृढ़संकल्पित होता है तो सब बाधाएं पीछे छूट जाती हैं। जॉन अब्राहम की फिल्म ‘परमाणु’ पोखरण 2 की इस पू…