शशि कपूर: सार्थक सिनेमा का मुहाफिज
राजीव रंजन शशि कपूर भी कमाल के शख्स थे। अभिनेता के रूप में मुख्यधारा के सिनेमा से कमाया और निर्माता के रूप में ‘जुनून’, ‘उत्सव’, ’36 चौरंगी लेन’ और ‘कलयुग’ जैसी ऑफबीट फिल्मों में लगाया। ये एक कलाकार के रूप में उनकी संजीदगी को दिखाता है। उनकी मुख्य पहचान ठेठ मुंबइया हीरो के रूप में रही, जो हीरो के लिए बॉलीवुड के बनाए पैमाने पर खरा उतरता था। लेकिन उन्होंने अपने करियर के पीक पर ‘सिद्धार्थ’ जैसी बिल्कुल अलग तरह की फिल्म की। एक समय में ढेर सारी फिल्में करने की वजह से ‘टैक्सी’ का खिताब पाने वाले शशि कपूर थियेटर के लिए भी उतने ही संजीदा रहे। उन्होंने अपने पिता के ‘पृथ्वी थियेटर’ को पुनर्जीवित किया। एक सदाबहार अभिनेता और संजीदा शख्स शशि कपूर को सादर श्रद्धांजलि। उनकी आंखों में एक चमक थी। वैसी ही चमक, जो झरने के शफ्फाक पानी पर सूर्य की किरणों से पैदा होती है। वह चमक उनके अभिनय में भी दिखाई देती थी। फिल्म ‘त्रिशूल’ में जब वह कहते हैं कि ‘मोहब्बत बड़े काम की चीज है’ तो वह महज अभिनय करते नहीं दिखते, बल्कि उन शब्दों को उनके संपूर्ण अर्थ के साथ जीते दिखाई देते हैं। भारतीय सिनेमा ...