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गुदड़ी के लाल कादर खान

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राजीव रंजन करीब  300  से ज्यादा फिल्मों में अभिनय करने और  250  से ज्यादा फिल्मों में संवाद लिखने वाले कादर खान की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।  ‘ फर्श से अर्श ’   पर पहुंचने की उनकी कहानी में इतने उतार - चढ़ाव है कि उस पर एक प्रेरक और रोचक फिल्म बन जाए। एक समय ऐसा भी था कि उनका रुतबा फिल्म के हीरो से ज्यादा हुआ करता था। निर्माता - निर्देशक उन्हें अपनी फिल्मों में लेने और संवाद लिखवाने के लिए इंतजार करते थे। उन्होंने अपने संवादों से  80  और  90  के दशक में फिल्मों की भाषा ही बदल दी। उनकी भाषा वैसी ही भाषा थी ,  जो आम आदमी बोलता है ,  समझता है ,  लेकिन उसमें कई बार दार्शनिकों वाली गहराई होती थी। हालांकि कई बार द्विअर्थी संवाद लिखने के कारण उनकी आलोचना भी हुई। बतौर अभिनेता आखिरी बार वह फिल्म  ‘ हो गया दिमाग का दही ’   में नजर आए थे। इसमें उनकी काफी छोटी भूमिका थी और उन्हें देख कर लगता था कि उनकी शारीरिक अवस्था ठीक नहीं है। कादर खान का जन्म अफगानिस्तान के काबुल में हुआ था। उनके पिता अब्दुल रहमान खा...