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फिल्म ‘सोनचिड़िया’ की समीक्षा

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चंबल के डाकुओं और उस समय का सच राजीव रंजन कलाकार: मनोज बाजपेयी ,  सुशांत सिंह राजपूत ,  रणवीर शौरी ,  भूमि पेडणेकर ,  आशुतोष राणा निर्देशक: अभिषेक चौबे तीन स्टार ( 3  स्टार) करीब  20  साल पहले भिंड जिले (चंबल क्षेत्र) के निवासी एक दोस्त से डकैती फिल्मों पर बात हो रही थी। उसने व्यंग्य से कहा कि हिन्दी फिल्मों में बीहड़ के डाकुओं को घोड़े पर बैठ कर आते-जाते दिखाया जाता है। बॉलीवुड वाले चंबल देख लें ,  तो उनको समझ में आ जाएगा कि सच्चाई क्या है। डाकुओं के जीवन पर बॉलीवुड में ढेर सारी फिल्में बनी हैं और सफल भी रही हैं।  60  और  70  के दशक में तो ऐसी फिल्मों की भरमार थी। इन फिल्मों ने डाकुओं की छवि जो जनमानस में पेश की ,  वह सच्चाई से कोसों दूर है। इस प्रचलित छवि को तोड़ने का काम शेखर कपूर निर्देशित  ‘ बैंडिट क्वीन ’  और तिग्मांशु धूलिया निर्देशित  ‘ पान सिंह तोमर ’  ने किया। अभिषेक चौबे निर्देशित  ‘ सोनचिड़िया ’  भी काफी हद तक यह काम करती है। एक दौर था ,  जब चंबल के बीहड़ों में डाकु...

कड़वी हकीकत की मार्मिक कहानी

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राजीव रंजन साढ़े तीन स्टार फिल्म: कड़वी हवा निर्देशक: नीला माधब पांडा कलाकार: संजय मिश्रा, रणवीर शोरी, तिलोत्तमा शोम, भूपेश सिंह, एकता सावंत कला की सार्थकता तभी है, जब वह यथास्थिति को चुनौती दे। जब आप बेचैन हों तो आपको शांति से भर दे और जब आप निश्चेष्ट हों तो आपको बेचैन कर दे। नीला माधब पांडा की ‘कड़वी हवा’ बेचैन करती है। यह मनोरंजन नहीं करती है, लेकिन मन को झकझोरती है। और ऐसा झकझोरती है कि जब आप सिनेमाहॉल से निकलेंगे तो थोड़े हिले हुए तो जरूर होंगे। यह फिल्म दो भिन्न भौगोलिक क्षेत्रों- चंबल इलाके के एक नेत्रहीन वृद्ध यानी बाबा (संजय मिश्रा) और ओडिशा के तटीय क्षेत्र के एक गांव के गन्नू (रनवीर शौरी) की कहानी है। दोनों प्रकृति की मार से सहमे अपने घर-परिवार को बचाने के लिए जी-जान से लगे हैं। एक की बेचैनी उसकी दयनीयता में प्रकट होती है और दूसरे की हृदयहीनता में। संजय मिश्रा सूखा प्रभावित बुंदेलखंड के एक गांव महुआ के निवासी हैं। उनके बेटे मुकुंद (भूपेश सिंह) पर बैंक का कर्ज चढ़ गया है। वह हमेशा कर्ज की चिंता से घिरा रहता है और बाबा इस चिंता से घिरे रहते हैं कि कहीं उनका बेटा दूसरे ...