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फिल्म सुपर 30 की समीक्षा

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एक वास्तविक हीरो की मसालेदार दास्तां राजीव रंजन निर्देशक: विकास बहल कलाकार: हृतिक रोशन , पंकज त्रिपाठी , मृणाल ठाकुर , आदेश श्रीवास्तव , नंदिश सिंह , वींरेद्र सक्सेना , विजय वर्मा , दीपाली गौतम ढाई स्टार किसी प्रसिद्ध व्यक्ति के जीवन पर आधारित फिल्म बनाते समय फिल्मकार के सामने कई चुनौतियां होती हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि प्रामाणिकता को बरकरार रखते हुए उसे दर्शकों के सामने इस तरह परोसा जाए कि न तो वह डॉक्यूमेंट्री लगे , और न ही घोर नाटकीयता का शिकार हो जाए। खासकर व्यक्ति जब जीवित होता है , तब यह चुनौती और बढ़ जाती है , क्योंकि सूचनओं की बाढ़ और सोशल मीडिया के इस दौर में उसके बारे में लोगों को बहुत कुछ पता होता है। सकारात्मक और नकारात्मक सारी सूचनाएं। इसलिए अच्छी स्क्रिप्ट और सटीकता बहुत जरूरी होती है। विकास बहल निर्देशित और हृतिक रोशन अभिनीत  ‘ सुपर 30’ इस मामले में अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरती है। प्रसिद्ध गणितज्ञ आनंद कुमार (हृतिक रोशन) एक निम्नवर्गीय परिवार से हैं। उनके पिता , जिन्हें वह प्यार से ईश्वर (वीरेंद्र सक्सेना) कहते है , एक पोस्टमैन हैं। आनंद गणित व...

अभिनय को देखो, चेहरा न देखो

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राजीव रंजन मायानगरी की मायावी दुनिया अब अपना चेहरा बदल रही है। इस मायावी दुनिया के द्वार पर यथार्थ पिछले कुछ सालों से लगातार दस्तक हो रही थी। ये दस्तक उन कलाकारों, फिल्मकारों की थी, जो इस चकाचौंध भरी नगरी के बने-बनाए खांचों में फिट नहीं होते थे, लेकिन उनके पास एक अलग शैली थी, कुछ अलग-सी कहानियां थीं। वह दस्तक मायानगरी के अंदर सुनी तो जा रही थी, लेकिन उसके पट नहीं खुल रहे थे। हां, 2017 में इस दस्तक से द्वार की सांकल जरूर खुल गई थी और ‘फुकरे रिटन्र्स’, ‘न्यूटन’, शुभ मंगल सावधान, बरेली की बर्फी, लिपस्टिक अंडर माई बुर्का जैसी फिल्में न सिर्फ आलोचकों द्वारा सराही गईं, बल्कि व्यावसायिक रूप से भी हिट रहीं। इनमें काम करने वाले कलाकार लोगों के जेहन में उतरने लगे। इन फिल्मों के निर्देशकों को लोग जानने लगे। वर्ष 2018 ने बाकी का काम पूरा कर दिया और दरवाजे को पूरी तरह खोल दिया। अगर आप इस साल की फिल्मों और उनमें का करने वाले कलाकारों पर नजर डालें तो एक नया-सा कोलाज दिखाई देगा। उस कोलाज में स्टारों के चेहरे इक्का-दुक्का ही नजर आएंगे। उस कोलाज में ऐसे चेहरे नजर आएंगे, जिनकी पहचान उनकी सूरत नहीं,...

फिल्म स्त्री की समीक्षा

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हंसी और डर के जरिये स्त्री का बात राजीव रंजन कलाकार : राजकुमार राव , श्रद्धा कपूर , पंकज त्रिपाठी , अपारशक्ति खुराना , अभिषेक बनर्जी , विजय राज , अतुल श्रीवास्तव निर्देशक : अमर कौशिक 3 स्टार ( तीन स्टार ) गोलमाल सिरीज की पिछली किस्त ‘ गोलमाल अगेन ’ की शानदार सफलता ने बॉलीवुड में हॉरर - कॉमेडी विधा के लिए संभावनाओं के नए दरवाजे खोले हैं। ‘ स्त्री ’ भी इसी शैली की फिल्म है। हालांकि इसे सिर्फ इसी खांचे में रख कर देखना इसके साथ पूरा न्याय नहीं होगा। दरअसल यह फिल्म केवल डर और हंसी ही नहीं परोसती , कुछ कहने का प्रयास भी करती है। फिल्म की कहानी घटती है मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक शहर चंदेरी में। चंदेरी अपनी सिल्क और कॉटन की हस्तनिर्मित साड़ियों के लिए मशहूर रहा है , लेकिन फिल्म की कहानी का उससे कोई लेना - देना नहीं है। हां , कपड़े से फिल्म के तार जरूर जुड़े हैं। चंदेरी में तीन दोस्त रहते हैं - विकी ( राजकुमार राव ), बिट्टू ( अपारशक्ति खुराना ) और जना ...